कांग्रेस ने की कानून-व्यवस्था सुधारने की मांग: प्रीतम सिंह ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन

Date/07/04/2026

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष एवं सीईसी सदस्य प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेसजनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य सचिव से मुलाकात कर राज्य में ध्वस्त पड़ी कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं महानगर में संचालित पब-बार संचालन पर प्रभावी नियंत्रण लगाये जाने के सम्बन्ध में ज्ञापन प्रेषित किया। मुख्य सचिव को सौंपे ज्ञापन में प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में हाल के समय में कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं तथा पब-बार संस्कृति को लेकर जनमानस में गहरी चिंता व्याप्त है। देहरादून में दिन दहाडे हो रहे हत्याकांड विशेष रूप से मसूरी डायबर्जन पर हुई गोलीकांड की घटना ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। यह भी अत्यंत चिंताजनक है कि प्रदेश में अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद ही सरकारी मशीनरी सक्रिय होती है, जबकि आवश्यक है कि पूर्व से ही सतर्क और सक्रिय व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

प्रीतम सिंह ने कहा कि वर्तमान में एक विरोधाभासी स्थिति देखने को मिल रही है कि जहां सामान्य दिनों में बार संचालन के समय निर्धारित हैं, वहीं सप्ताहान्त (शनिवार-रविवार) पर बार को देर रात 12 बजे तक खुले रखने की अनुमति दी जा रही है। यह व्यवस्था कानून-व्यवस्था की दृष्टि से गंभीर चिंताओं को जन्म देती है, विशेषकर जब देर रात आपराधिक घटनाओं की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। अतः इस विषय में स्पष्ट, सुसंगत एवं कड़ाई से लागू होने वाली नीति बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होने मुख्य सचिव से मांग करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों एवं जनभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए कई सुझाव शासन स्तर पर लागू किए जाने अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है। थाना स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा प्रत्येक सप्ताह अनिवार्य क्राइम रिव्यू बैठक आयोजित की जाए। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर सुनसान एवं बाहरी इलाकों में, पुलिस गश्त को सुदृढ़ किया जाए एवं पीसीआर वैन की संख्या बढ़ाई जाए। अपराध की घटना होने पर संबंधित बीट अधिकारी एवं थाना प्रभारी की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।

राज्यभर में नियमित रूप से सत्यापन अभियान चलाया जाए, विशेषकर बाहरी व्यक्तियों एवं होमस्टे संचालकों के लिए। महिला सुरक्षा के दृष्टिगत प्रत्येक जनपद में विशेष महिला सुरक्षा टीम का गठन किया जाए। प्रमुख स्थानों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों को आधुनिक तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ा जाए। 112 आपातकालीन सेवा के रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम किया जाए।

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