Date/07/05/2026
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के हित में किए जा रहे प्रयास अब प्रभावी परिणाम देने लगे हैं। कर्जन रोड स्थित गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में संचालित जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) दिव्यांगजनों के लिए राहत और सहारा बनकर उभरा है। यहां मिलने वाली सुविधाओं से न केवल दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है, बल्कि समाज में उन्हें समान अधिकार और सम्मान भी प्राप्त हो रहा है।
गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में प्रत्येक बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं, जिससे लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिल रही है। वहीं, डीडीआरसी द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 8791009301 के माध्यम से दिव्यांगजन घर बैठे भी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
जिलाधिकारी की पहल पर सितंबर 2025 से गांधी शताब्दी अस्पताल में शुरू हुए डीडीआरसी में अब तक 600 से अधिक दिव्यांगजनों के यूडीआईडी (यूनिक डिसेबिलिटी आईडी) कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की दिव्यांग बोर्ड द्वारा 600 नए दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, जबकि 250 प्रमाण पत्रों का नवीनीकरण भी किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2009 से अब तक जनपद में 30,739 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 1,064 प्रमाण पत्रों का नवीनीकरण किया गया है।
दून निवासी दिव्यांग लाभार्थी मनोज बहुगुणा ने बताया कि लंबे समय से उन्हें यूडीआईडी कार्ड बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। डीडीआरसी के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने केंद्र पहुंचकर आवेदन किया, जहां दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनका यूडीआईडी कार्ड तैयार हो गया। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में पहली बार गांधी शताब्दी अस्पताल में डीडीआरसी संचालन के लिए चार कमरे उपलब्ध कराए गए हैं। केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजनों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक वर्ष से भी कम समय में 600 नए दिव्यांग प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड तैयार किए गए हैं, जबकि 250 प्रमाण पत्रों का नवीनीकरण भी किया जा चुका है।