Date/18/06/2026
देहरादून। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण तथा अवैध प्लाटिंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सहसपुर क्षेत्र के कल्याणपुर में लगभग 50 बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया। एमडीडीए लंबे समय से अवैध निर्माणों और बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में प्राधिकरण को सूचना मिली थी कि नया हाईवे, कल्याणपुर, सहसपुर क्षेत्र में भू-स्वामी जैद रफी द्वारा लगभग 50 बीघा भूमि पर बड़े स्तर पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। यहां प्लॉटों का चिन्हीकरण करने के साथ-साथ सीसी सड़क का निर्माण भी कराया गया था, जबकि इसके लिए प्राधिकरण से किसी प्रकार की स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई थी।
जांच में मिली अनियमितताएं
प्राधिकरण की टीम द्वारा मौके का निरीक्षण किए जाने पर पाया गया कि संबंधित भूमि पर आवासीय कॉलोनी विकसित करने की तैयारी की जा रही थी। प्लॉटों का सीमांकन किया जा चुका था तथा आंतरिक संपर्क मार्ग के रूप में सीसी सड़क भी डाली गई थी। यह पूरा कार्य विकास प्राधिकरण की अनुमति के बिना किया जा रहा था, जो उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) संशोधन अधिनियम 2009 के प्रावधानों का उल्लंघन है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एमडीडीए द्वारा संबंधित भू-स्वामी के विरुद्ध वाद योजित किया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार को प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम, पुलिस बल तथा संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध रूप से विकसित किए गए निर्माण कार्यों और प्लाटिंग संबंधी संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया।
अवैध कॉलोनियों पर लगातार सख्ती
एमडीडीए द्वारा पिछले कुछ समय से अवैध निर्माण, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्राधिकरण का मानना है कि अनियोजित विकास न केवल शहर की आधारभूत संरचनाओं पर दबाव बढ़ाता है, बल्कि भविष्य में नागरिक सुविधाओं और यातायात व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौतियां उत्पन्न करता है।
निवेशकों को भी सतर्क रहने की सलाह
एमडीडीए ने आम नागरिकों और निवेशकों से अपील की है कि किसी भी भूखंड या कॉलोनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य कर लें। बिना स्वीकृति विकसित की गई कॉलोनियों में निवेश करने पर भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।