सूर्यास्त के बाद भी गर्म पानी देने वाली ‘थर्मल बैटरी’ विकसित, 14 घंटे तक रखेगा 50-60°C तापमान

Date/27/06/2026

देहरादून। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी सौर तापीय ऊर्जा संचयन प्रणाली विकसित की है, जो फेज चेंज मटेरियल आधारित थर्मल बैटरी में सौर ताप को संग्रहीत करके सूर्यास्त के बाद भी गर्म पानी उपलब्ध कराती है। यह तकनीक सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सूर्य की अनुपस्थिति में इसकी उपलब्धता का समाधान करती है और पानी गर्म करने के लिए बिजली और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने की क्षमता रखती है। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. अनीता नेने और डॉ. रोहित घाडगे द्वारा विकसित यह प्रणाली, शेफलर सोलर कंसंट्रेटर को पैराफिन वैक्स (मोम) युक्त थर्मल स्टोरेज कैप्सूल के साथ जोड़ती है। पैराफिन वैक्स एक फेज चेंज मटेरियल है, जो बड़ी मात्रा में गर्मी को संग्रहीत करने और छोड़ने में सक्षम है।

इलेक्ट्रोकेमिकल बैटरी पर निर्भर पारंपरिक ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विपरीत, यह प्रस्तावित समाधान ऊर्जा को सीधे गर्मी के रूप में संग्रहीत करता है। गर्मी को अधिक समय तक बनाए रखने और ऊर्जा के कुशल उपयोग के लिए इस प्रणाली में एक अलग करने योग्य पीसीएम ट्यूब, वॉटर-जैकेट हीट ट्रांसफर मैकेनिज्म और पॉलीयुरेथेन इंसुलेशन का उपयोग किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रयोगशाला स्तर के परीक्षणों के दौरान, यह तकनीक लगभग 18 मिनट में पूरी तरह से थर्मल चार्ज हो गई और लगभग 32 मिनट में पूरी तरह से डिस्चार्ज हो गई। सौर इनपुट हटा दिए जाने के बाद भी यह प्रणाली गर्म पानी की आपूर्ति करती रही, जो दिन के उजाले के बाद भी तापीय ऊर्जा प्रदान करने की इसकी क्षमता को साबित करता है। इसका प्रोटोटाइप लगभग 1.5 से 2 ाॅी थर्मल ऊर्जा संग्रहीत करता है और चार्जिंग के बाद 14 घंटे तक पानी का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रख सकता है। पारंपरिक इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर की तुलना में, यह तकनीक सालाना लगभग 2.5 से 3 टन कार्बन उत्सर्जन कम कर सकती है, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा और स्थिरता लक्ष्यों में योगदान देगा। डॉ. अनीता नेने ने कहा, सौर ऊर्जा की एक बड़ी सीमा यह है कि यह केवल तभी उपलब्ध होती है जब सूरज चमक रहा होता है। हमारा उद्देश्य एक सरल, लागत प्रभावी और टिकाऊ थर्मल स्टोरेज समाधान विकसित करना था, जो सौर ऊर्जा को संग्रहीत कर सके और जरूरत पड़ने पर उसे उपलब्ध करा सके।

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