ट्रॉली और लकड़ी के पुल के सहारे जान जोखिम में डाल रहे श्रद्धालु

Date/04/08/2026

रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के प्रमुख आधार शिविर बनातोली में निर्माणाधीन झूला पुल पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। पुल का निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों और हजारों तीर्थयात्रियों को आज भी मोरखण्डा आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ते ही लकड़ी का अस्थायी पुल बह जाता है, जिससे लोगों के सामने ट्रॉली ही एकमात्र विकल्प बचता है। ऐसे में हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि झूला पुल का निर्माण शुरू होने पर सुरक्षित आवागमन की उम्मीद जगी थी, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। बारिश के दौरान नदी उफान पर होने से हालात और गंभीर हो जाते हैं। कई बार घंटों तक लोगों को नदी पार करने का इंतजार करना पड़ता है, जबकि ट्रॉली के सहारे आवाजाही के दौरान दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।

मद्महेश्वर धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यात्रा मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। उनका कहना है कि यदि झूला पुल समय पर तैयार हो गया होता तो न स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती और न ही तीर्थयात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती।

बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत सहित मद्महेश्वर घाटी के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि मद्महेश्वर यात्रा क्षेत्र की आर्थिकी का महत्वपूर्ण आधार है और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अधूरा पुल न केवल ग्रामीणों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन और तीर्थाटन की छवि पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि झूला पुल का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं कराया गया तो वे जनआंदोलन शुरू करने को विवश होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कर यात्रा मार्ग को सुरक्षित बनाने की मांग की है।

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