धार्मिक पर्यटन से स्थानीय कारोबार को भी मिल रही रफ्तार,

Date/26/08/2026

रुद्रप्रयाग। भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह स्थल त्रियुगीनारायण में सात फेरों के लिए देशभर से नवयुगल पहुंच रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं से जुड़े इस धाम में अखंड धूनी को साक्षी मानकर विवाह करने का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। शुभ मुहूर्तों में यहां बड़ी संख्या में विवाह संपन्न हो रहे हैं। नवंबर 2025 से जुलाई 2026 तक 1564 से अधिक शादियां त्रियुगीनारायण में संपन्न होने की जानकारी तीर्थ पुरोहित समिति ने दी है।

त्रियुगीनारायण में विवाह को लेकर नवयुगलों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंच रहे जोड़े भगवान शिव और माता पार्वती को साक्षी मानकर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे ले रहे हैं और दांपत्य जीवन की नई शुरुआत कर रहे हैं। विवाह स्थल पर मौजूद अखंड धूनी को पवित्र अग्नि का प्रतीक माना जाता है और इसी के समक्ष विवाह की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

त्रियुगीनारायण व्यापार संघ के अध्यक्ष महेंद्र सेमवाल के मुताबिक बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय व्यापार में भी तेजी आई है। विवाह समारोहों के चलते होटल, होम स्टे, पूजा सामग्री, फूल-माला, खानपान और अन्य स्थानीय व्यवसायों से जुड़े लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि त्रियुगीनारायण में बढ़ती विवाह और धार्मिक पर्यटन गतिविधियां क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं। यदि यहां पर्यटन सुविधाओं, यातायात, आवास और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाए तो त्रियुगीनारायण देश के प्रमुख विवाह एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रियुगीनारायण में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया और त्रियुगीनारायण में यह दिव्य परिणय संपन्न हुआ।

मान्यता है कि विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई, जबकि भगवान ब्रह्मा ने पुरोहित के रूप में वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न कराया। विवाह के दौरान प्रज्वलित हुई पवित्र अग्नि आज भी अखंड धूनी के रूप में जल रही है। इसी कारण त्रियुगीनारायण को विवाह संस्कार के लिए विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।

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