वैज्ञानिक व किफायती मॉडल से किसान साल में ले सकेंगे एक से अधिक रेशम फसलें

Date/03/09/2026

देहरादून। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत केंद्रीय रेशम बोर्ड, केंद्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र , सहसपुर, देहरादून में “आदर्श एवं वहनीय रेशमकीट पालन गृह” का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में तकनीकी संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य रेशम उत्पादक किसानों के लिए वैज्ञानिक, वहनीय एवं अनुकूल रेशमकीट पालन वातावरण उपलब्ध कराने तथा रेशम उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में तकनीकी समाधान विकसित करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की, एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगीत के साथ किया गया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा नव-निर्मित आदर्श एवं किफायती रेशमकीट पालन गृह का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के दौरान रेशमकीट पालन में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग, पालन गृह के अनुकूल वातावरण तथा किसानों की उत्पादकता एवं आय बढ़ाने में इसकी संभावित भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा कि आदर्श एवं किफायती रेशमकीट पालन गृह का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन तथा किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने युवाओं को रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराते हुए नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीकों के साथ रेशमकीट पालन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के बेहतर स्वास्थ्य एवं विकास के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार रेशमकीटों के समुचित विकास एवं गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण शहतूत पत्तियां अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने रेशमकीट पालन गृह के आंतरिक वातावरण एवं तापमान नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मॉडल रेशमकीटों के लिए अनुकूल परिवेश उपलब्ध कराने में सहायक हो सकता है।उन्होंने यह भी बताया कि अल्मोड़ा के खूंट ग्राम में आईआईटी रुड़की द्वारा लगभग एक लाख शहतूत के पौधों का रोपण किया गया है।

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