*देहरादून: 14 साल बाद अलंकार ज्वेलर्स का दूसरा शोरूम भानियावाला में, पहाड़ी थीम पर सजेगा, 14 सितंबर को होगा भव्य शुभारंभ

Date/12/09/2026

देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध पारंपरिक ज्वेलरी को आधुनिक डिजाइनों के साथ नई पहचान देने की दिशा में अलंकार ज्वेलर्स एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। ऋषिकेश में 14 वर्षों से अधिक समय से ग्राहकों का विश्वास जीतने के बाद अब अलंकार ज्वेलर्स अपने दूसरे शोरूम के साथ भानियावाला में दस्तक दे रहा है। नए शोरूम का भव्य शुभारंभ 14 सितंबर को किया जाएगा। खास बात यह है कि इस शोरूम को पूरी तरह पहाड़ी थीम पर तैयार किया गया है, जहां ग्राहकों को गढ़वाली और कुमाऊंनी पारंपरिक आभूषणों की विशेष एवं आकर्षक रेंज देखने को मिलेगी। शोरूम के शुभारंभ से पहले शनिवार को विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान 11 पंडितों द्वारा विशेष पूजा एवं हवन कर शोरूम के सफल संचालन और समृद्धि की कामना की गई। अलंकार ज्वेलर्स के ऑनर सावन वर्मा ने बताया कि नए शोरूम के शुभारंभ को लेकर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के पहले दिन 12 सितंबर को 11 ब्राह्मणों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद 13 सितंबर को ग्रैंड प्रीव्यू का आयोजन होगा, जिसमें ग्राहकों को शोरूम के नए कलेक्शन से रूबरू कराया जाएगा और विशेष ऑफर्स की जानकारी दी जाएगी। वहीं 14 सितंबर को शोरूम का भव्य उद्घाटन किया जाएगा, जिसमें स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि नए शोरूम में सोने, चांदी, डायमंड और कुंदन के आधुनिक एवं पारंपरिक आभूषणों के साथ-साथ गढ़वाली और कुमाऊंनी आभूषणों की विशेष रेंज उपलब्ध होगी। खास तौर पर उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान से जुड़े आभूषणों में पहाड़ी नथ, पौंची, तिमनिया सहित विभिन्न पारंपरिक डिजाइनों को विशेष स्थान दिया गया है।

सावन वर्मा ने बताया कि अलंकार ज्वेलर्स की कहानी सिर्फ एक कारोबार की कहानी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की ज्वेलरी परंपरा और विरासत से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1983 में उनके दादा ने रुद्रप्रयाग से ज्वेलरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक परिवार ने पहाड़ी आभूषणों की पारंपरिक कला को संजोने और उसे आगे बढ़ाने का काम किया है। आज भी गढ़वाली और कुमाऊंनी पारंपरिक आभूषणों के कई विशेष डिजाइन अलंकार ज्वेलर्स में तैयार किए जाते हैं।

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