गुरु मां पूर्णमति माताजी ने कहा-जीवन की लीग में अनुशासन और सद्संग से मिलती है सफलता

Date/02/10/2026

देहरादून। सकल दिगंबर जैन समाज एवं श्री विद्या समय पूर्ण वर्षा योग समिति की ओर से पुण्यार्जक तारिका पाटनी (वंडर सीमेंट, आरके मार्बल्स) के सहयोग से टच्स् आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव का आयोजन देहरादून जैन भवन स्टेडियम में किया जा रहा है। आयोजन में क्रिकेट के माध्यम से धर्म, संस्कार, अनुशासन और सामाजिक एकता का अनूठा संदेश दिया जा रहा है। महामहोत्सव के तहत शुक्रवार सुबह मंदिरजी में विधिविधान से शांतिधारा की गई। इसके पश्चात बड़ी संख्या में साधर्मीजन हाथों में बैनर लेकर रैली के रूप में विद्या समय पूर्ण स्टेडियम पहुंचे। यहां आध्यात्मिक क्रिकेट लीग के मुकाबलों का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि प्रतियोगिता में देहरादून, इंदौर, विकासनगर, तमिलनाडु, अहमदाबाद, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, आगरा, गाजियाबाद, ग्वालियर, डोंगरगढ़, हरिद्वार और महाराष्ट्र सहित विभिन्न स्थानों से आई टीमों ने प्रतिभाग किया। मुख्य अतिथि माहिन वर्मा, बीसीसीआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान में उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव, ने टॉस कर मैच का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि खेल के साथ धर्म, संस्कार और सामाजिक एकता को जोड़ना समाज के लिए प्रेरणादायी पहल है। कार्यक्रम समन्वयक अंकुर जैन ने बताया कि प्रतियोगिता में शुक्रवार को 16 टीमों के बीच मुकाबले हुए, जिनमें आठ टीमों ने जीत दर्ज कर अगले दौर में प्रवेश किया। विजेता टीमों में दिल्ली, विकासनगर, तमिलनाडु, हरिद्वार, इंदौर, ग्वालियर और आगरा शामिल रहीं। प्रतियोगिता के आध्यात्मिक स्वरूप के तहत क्रिकेट के साथ ज्ञान और धर्म से जुड़े प्रश्न भी पूछे जा रहे हैं। गेंदबाज द्वारा पूछे गए प्रश्न का तत्काल सही उत्तर देने पर अतिरिक्त रन दिए जाने की व्यवस्था आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में शनिवार को क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे, जबकि इसके बाद सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा।

जीवन की लीग में अनुशासन और सद्संग जरूरी

इस अवसर पर पूज्य गुरु मां श्री पूर्णमति माताजी के मंगल प्रवचन हुए। उन्होंने क्रिकेट लीग के माध्यम से जीवन के आध्यात्मिक पक्ष को समझाते हुए कहा कि वास्तविक और पूर्ण विद्या वही है, जो मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर आत्मज्ञान की ओर ले जाए। सांसारिक शिक्षा जहां जीविका चलाने का मार्ग दिखाती है, वहीं पूर्ण विद्या मनुष्य को जीवन जीने की सही कला सिखाती है।

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