1952 से चली आ रही ऐतिहासिक टिहरी रामलीला महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन, इस बार 1 करोड़ दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य

Date/04/10/2026

देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आयोजित होने जा रहे ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ की स्मारिका का विमोचन किया गया। स्मारिका में पुरानी टिहरी की रामलीला की 1952 से अब तक की यात्रा, इसके गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और वर्तमान उपलब्धियों को संजोया गया है। स्मारिका का विमोचन समिति के संरक्षक मंडल के सदस्य एवं वर्ष 1961 से रामलीला के वरिष्ठतम कलाकार बछेंद्र कुमार पांडेय ने किया। उल्लेखनीय है कि पांडेय ने वर्ष 1973 में निभाए अपने किरदार को 50 वर्ष बाद वर्ष 2023 में पुनः रामलीला मंचन के दौरान निभाकर ऐतिहासिक परंपरा को जीवंत किया था।

समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने बताया कि पुरानी टिहरी, जो कभी गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी रही, की 1952 से चली आ रही रामलीला टिहरी बांध के निर्माण के बाद पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के कारण अपनी मूल भूमि से दूर हो गई। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से समिति ने 21 वर्ष के अंतराल के बाद वर्ष 2023 में देहरादून में रामलीला का पुनर्जीवन किया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित रामलीला को विभिन्न देशों में डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा। इस उपलब्धि के बाद समिति ने इस वर्ष आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से रामलीला को एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस वर्ष महोत्सव में संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। लेजर एवं साउंड शो के माध्यम से गढ़वाल के गौरवशाली इतिहास को भव्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल लाइव टेलीकास्ट, बड़ी डिजिटल स्क्रीन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के जरिए देश-विदेश के दर्शक रामलीला से जुड़ सकेंगे। हालांकि तकनीक के इस विस्तार के बावजूद रामलीला के चैपाई, संवाद, कथा और पारंपरिक मंचन शैली में वर्ष 1952 से चली आ रही मूल परंपरा को पूरी तरह कायम रखा जाएगा।

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