12 घंटे 46 मिनट में फतह की उहुरू चोटी

Date/06/11/2026

देहरादून। माउंट किलिमंजारो की 5,895 मीटर ऊंची चोटी तक पहुंचना ही अपने आप में बड़ी चुनौती है, लेकिन भारतीय पर्वतारोही और मैराथन धावक कविता चंद ने इस चुनौती को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया। उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी उहुरू पीक तक पहुंचने और वापस लौटने का पूरा सफर महज 22 घंटे 36 मिनट में पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ वह 24 घंटे से कम समय में माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई और वापसी पूरी करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। उन्हें चोटी तक पहुंचने में 12 घंटे 46 मिनट लगे। कविता ने म्वेका गेट से अपनी यात्रा शुरू की। वह उहुरू पीक पर पहुंचीं और फिर उसी रास्ते से वापस शुरुआती स्थान पर लौटीं। आमतौर पर माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई और वापसी में पांच से नौ दिन का समय लगता है। इसकी वजह सिर्फ पहाड़ की ऊंचाई नहीं, बल्कि वहां की परिस्थितियां भी हैं। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा में ऑक्सीजन कम होती जाती है, इसलिए पर्वतारोहियों को अपने शरीर को वहां के अनुकूल बनाने के लिए समय देना पड़ता है। कविता ने इस चुनौती को बेहद कम समय में पूरा करने के लिए अपनी शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति पर लंबे समय तक काम किया था।

इसकी तैयारी शिकागो मैराथन से भी जुड़ी थी। 11 अक्टूबर को हुई इस मैराथन के लिए कविता ने तीन महीने तक लगातार प्रशिक्षण लिया। वह हर सप्ताह करीब 70 से 90 किलोमीटर दौड़ती थीं। इसके साथ ही सप्ताह में तीन बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती थीं, ताकि उनकी मांसपेशियां मजबूत रहें और शरीर लंबे समय तक शारीरिक दबाव सहने के लिए तैयार हो सके। उनकी मेहनत का परिणाम मैराथन में भी दिखा, जहां वह भारतीय महिलाओं में तीसरे स्थान पर रहीं। शिकागो मैराथन पूरी करने के बाद कविता ने अपनी तैयारी का अगला चरण शुरू किया। वह नेपाल में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल अभियान पर गईं। हालांकि, वह इस पर्वत की चोटी तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचीं। इस दौरान उन्हें अधिक ऊंचाई पर चढ़ाई करने और वहां की कठिन परिस्थितियों का अनुभव मिला। किलिमंजारो अभियान से पहले यह अनुभव उनके लिए काफी अहम रहा।

किलिमंजारो पर तेज गति से चढ़ाई करने का विचार कैसे आया, इस बारे में कविता ने कहा, किलिमंजारो मेरी सेवन समिट्स यात्रा की सूची में पहले से शामिल था। कुछ लोगों ने मुझे यहां कम समय में चढ़ाई पूरी करने की सलाह दी थी। चूंकि मुझे इस पर्वत पर चढ़ना ही था, इसलिए मैंने इसे थोड़ा और रोमांचक बनाने का फैसला किया। 12 घंटे 46 मिनट में चोटी पर पहुंचना और 22 घंटे 36 मिनट में पूरी यात्रा खत्म करना मेरे लिए बेहद खास है। मैं बूट्स एंड क्रैम्पन्स के भरत और रोमिल के साथ-साथ पूरी टीम का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने इस यात्रा में मेरा साथ दिया और इसे सफल बनाने में मदद की।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए पर्दे के पीछे भी काफी तैयारी की गई थी। बूट्स एंड क्रैम्पन्स के भरत और रोमिल ने तंजानिया की स्थानीय टीम के साथ मिलकर पूरे अभियान का समन्वय किया। इसमें रास्ते की योजना, जरूरी सामान और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल थीं। कविता के पहुंचने से पहले ही अग्रिम टीम ने 4,673 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बाराफू कैंप में शिविर तैयार कर लिया था। चोटी तक पहुंचने के दौरान गाइड 1 उनके साथ रहे और एक समिट पोर्टर ने भी मदद की। गाइड 2 ने चढ़ाई के शुरुआती हिस्से और वापसी में उनका साथ दिया, जबकि तंजानिया में स्थानीय व्यवस्थाओं का समन्वय इमैनुएल ने संभाला।

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