दून पुस्तक महोत्सव में साहित्यिक चर्चा: “समाज के हित की बात जिसमें हो, वही साहित्य है”

Date/05/04/2026

देहरादून। देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वाधान में नौ दिवसीय ’दून पुस्तक महोत्सव’ चल रहा है। दून पुस्तक महोत्सव के दूसरे दिन ’दून लिट फेस्ट’ का भव्य उद्घाटन हुआ, जिसमें साहित्य, समाज और ज्ञान के विभिन्न आयामों पर सार्थक चर्चा देखने को मिली। उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ’निशंक’, शिशु रोग विशेषज्ञ पघ्द्मश्री डॉ. आर. के. जैन, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे तथा देव भूमि यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष अमन बंसल सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उघ्द्बोधन देते हुए प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे ने साहित्य की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा, “समाज के हित की बात जिसमें हो, वही साहित्य है। शब्दों और वाक्यों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति ही साहित्य है।“ उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सुमित्रानंदन पंत और शैलेष मटियानी जैसे महान साहित्यकारों के कारण यह परंपरा आज भी गौरवशाली बनी हुई है।

पघ्द्मश्री डॉ. आर.के. जैन ने अपने संबोधन में पुस्तकों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि “निशंक द्वारा स्थापित ’लेखक गांव’ के पुस्तकालय में एक लाख पुस्तकों को संजोने का लक्ष्य रखा गया है। पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है।“ उन्होंने वैज्ञानिक माइकल फैराडे के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने पुस्तकों से प्रेरणा लेकर महान आविष्कार किए। उन्होंने कहा कि जीवन में पढ़ने की आदत व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है। मुख्य अतिथि रमेश पोखरियाल ’निशंक’ ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “एनबीटी विश्वभर में पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान की सुगंध फैला रहा है।” उन्होंने कहा, “जो सोचता है, वही कवि और लेखक होता है। जब आप लिखना शुरू करते हैं, तो आप स्वतः लेखक बन जाते हैं। शब्द ही ब्रह्मांड है और यह दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है।“कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अधिकारी एवं दून पुस्तक महोत्सव के सीनियर प्रोजेक्ट इंचार्ज अशोक धनखड़ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर आयोजित ’दून लिट फेस्ट’ के पहले सत्र में लेखक एवं इंवेस्टिगेटिव पत्रकार जुपिंदर सिंह ने अपनी पुस्तक ’भगत सिंह की पिस्तौल की खोज’ पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पुस्तक के लेखन के दौरान आई चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि “किसी भी शोध की शुरुआत आर्काइव से होती है।“ उन्होंने भगत सिंह से जुड़े रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि “भगत सिंह ने अपनी पिस्तौल केवल एक बार चलाई थी।” उन्होंने युवा पत्रकारों को संदेश दिया कि वे जिस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, उससे जुड़ी ऐतिहासिक समझ विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगत सिंह की पिस्तौल को अपने हाथों में पकड़ना उनके लिए एक ऐतिहासिक अनुभव रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *