आपदा प्रबंधन: युवाओं को सुरक्षित रखने का प्रशिक्षण

Date/07/04/2026

देहरादून। यूथ रेडक्रॉस कमेटी के मुख्य आपदा प्रबंधन अधिकारी डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की संवेदनशीलता के भूकंपीय दृष्टिकोण से अब छटे जोन में आ जाने से स्थानीय युवाओं और समुदाय को आपदा प्रबंधन का विधिवत प्रशिक्षण दिया जाना और भी महत्वपूर्ण एवं आवश्यक हो गया है। डॉ. वर्मा डीएवी कॉलेज के दीन दयाल उपाध्याय सभागार में साइंस फैकल्टी द्वारा “आपदा प्रबंधन के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक एवं व्यक्तिगत विकास“ विषय पर आयोजित विशेष कार्यशाला एवं प्रशिक्षण शिविर में बतौर मास्टर ट्रेनर प्रोफ़ेसरों एवं छात्र-छात्राओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में किसी भी क्षण लगभग 8 रिक्टर स्केल का भूकंप आ सकता है,जो बड़ी तबाही ला सकता है।डॉव वर्मा ने कहा कि आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण युवाओं को आपदा की गंभीर स्थिति में भी शांत भाव से निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है, क्योंकि आपदाएं गहरा सामाजिक, आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव छोड़ती हैं।अतः युवाओं द्वारा प्राप्त अग्नि शमन, रेस्क्यू तथा फर्स्ट एड आदि का प्रायोगिक प्रशिक्षण आपदा के समय स्वयं को सुरक्षित रखते हुए दूसरों का जीवन बचाने की कुशलता प्रदान करता है। वह प्रभावित आम जनता के साथ-साथ महिलाओं विशेषकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, बीमारों, घायलों और दिव्यांगों को आपदाओं के दौरान प्राथमिकता के आधार पर रेस्क्यू करके उनका जीवन सुरक्षित करता है, क्योंकि वह जानता है कि आपदाएं सबसे अधिक उन्हें ही प्रभावित करती हैं।ऐसे समय में उनको इमरजेंसी मेथड्स ऑफ़ रेस्क्यू से सुरक्षित निकालकर समुचित जगह पर ले जाकर प्राथमिक चिकित्सा, आश्रय,भोजन, दवाइयाँ, दूध आदि उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

कार्यशाला व प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य प्रभारी अधिकारी व डीन फैकल्टी ऑफ़ साइंस प्रो० एस पी जोशी (उप प्राचार्य) महोदय ने कहा कि आपदाओं को रोक पाना असंभव है परन्तु कुशल प्रबंधन एवं सघन प्रशिक्षण से लोगों के जान-माल की हानि को कम किया जा सकता है। डॉ० जोशी ने बताया कि हेवनवबव गढ़वाल सेंट्रल यूनिवर्सिटी द्वारा यूवजीव लेवल के समस्त विद्यार्थियों के लिए आपदा प्रबंधन को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया गया है।इसमें डॉव अनिल वर्मा द्वारा इससे पूर्व डेढ़ महीना थ्योरी की कक्षाएं ली जा चुकी हैं।डीएवी कॉलेज प्रशासन द्वारा राज्य एवं राष्ट्र हित में इस विषय के महत्व को समझते हुए विद्यार्थियों को गंभीरता से थ्योरी एवं प्रैक्टिकल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षित युवा छात्र-छात्राएँ आपदाओं से निपटने में कारगर साबित हो सकें। प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि विशेष प्रशिक्षण शिविर में सर्च एंड रेस्क्यू के तहत इमरजेंसी मेथड्स ऑफ़ रेस्क्यू के फायरमेंस लिफ्ट,टो ड्रैग, बो लाइन ड्रैग, ह्यूमन क्रेडल, ह्यूमन क्रच, पिक-अबैक, रिवर्स पिक-अबैक, क्लब्ड हैंड्स,मंकी क्राल, टू-थ्री-फोर हैंडेड सीट, फोर एंड आफ्ट मेथड, ड्रा हिच तथा चेयर नॉट आदि रोप रेस्क्यू का प्रशिक्षण दिया गया। फर्स्ट एड के तहत हार्ट अटैक आदि के दौरान सीवपीवआरव (कार्डियो पल्मोनरी रीससीटेशन) का विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर 155 बार रक्तदान करने एवं कुशल प्रशिक्षण हेतु उपप्राचार्य, डीन साइंस फैकल्टी एवं वनस्पति विज्ञानं विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर डॉ. एस पी जोशी, जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शशि किरण सोलंकी ,भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोव डॉ. आर के शर्मा ने रक्तदाता शिरोमणि डॉ. अनिल वर्मा को पुष्प गुच्छ एवं उपहार भेंट करके सम्मानित किया गया। डॉ. वर्मा ने महाविद्यालय प्रशासन का उन्हें सम्मान प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया।

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