Date/14/05/2026
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर किए गए आह्वान के बाद अब उत्तराखंड में भी सरकारी विभाग सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ते ऊर्जा संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों के माध्यम से राष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग की अपील की गई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जनसामान्य पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन फ्लीट में वाहनों की संख्या आधी करने, सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” लागू करने और आवश्यकता पड़ने पर “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था अपनाने जैसे कदम उठाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सरकारी एवं निजी भवनों में एसी के सीमित उपयोग और अनावश्यक बिजली खपत रोकने पर भी जोर दिया गया है।
“एक अधिकारी, एक वाहन” का संदेश
राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप सरकारी कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है, वे एक दिन में अधिकतम एक ही वाहन का उपयोग करेंगे। सरकार का मानना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की पहल शुरू होती है तो इसका सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचेगा और आम लोग भी ऊर्जा बचत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे।
एमडीडीए ने शुरू की “तेल बचाओ मुहिम”
मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने भी तत्काल प्रभाव से ऊर्जा संरक्षण और तेल बचत को लेकर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों तेल बचत और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए। अधिकारियों-कर्मचारियों से कार्यालय आने-जाने के दौरान “कार पूलिंग” अपनाने की अपील की गई, ताकि अनावश्यक ईंधन खपत को कम किया जा सके। जो कर्मचारी कार्यालय के आसपास रहते हैं, उन्हें साइकिल या पैदल कार्यालय आने के लिए भी प्रेरित किया गया। इसके साथ ही अनावश्यक विदेश दौरों से बचने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया गया।