सावन में बढ़ी भीड़ से घंटों इंतजार, 2013 की आपदा के बाद आज तक नहीं बन सके स्थायी इंतजाम

Date/06/08/2026

रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध द्वतीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर धाम की यात्रा इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ कठिन परीक्षा भी बन गई है। धाम के प्रमुख आधार शिविर बनातोली में मधु गंगा नदी पर निर्माणाधीन झूला पुल पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसके चलते स्थानीय ग्रामीणों और हजारों श्रद्धालुओं को आज भी ट्रॉली और अस्थायी लकड़ी की पुलिया के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। बरसात के दौरान मधु गंगा का जलस्तर बढ़ते ही अस्थायी पुलिया बह जाती है, जिससे ट्रॉली ही आवाजाही का एकमात्र साधन बचता है। ऐसे में प्रतिदिन लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

सावन माह में बाबा मध्यमहेश्वर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ट्रॉली से नदी पार करने के लिए दोनों ओर लंबी कतारें लग रही हैं और श्रद्धालुओं को घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। उफनती नदी के ऊपर रस्सी के सहारे ट्रॉली से सफर करना श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

स्थानीय ग्रामीण विनोद राणा और सुभाष अंथवाल का कहना है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद इस स्थान पर स्थायी झूला पुल की आवश्यकता महसूस की गई थी। पुल निर्माण शुरू होने पर सुरक्षित आवागमन की उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। हर मानसून में अस्थायी लकड़ी की पुलिया बह जाने से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और तीर्थयात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

श्रद्धालु रोशन सिंह और पवन राजन का कहना है कि सरकार धार्मिक पर्यटन और चारधाम यात्रा को विश्वस्तरीय बनाने के दावे करती है, लेकिन मध्यमहेश्वर जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ मार्ग पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है। उनका कहना है कि यदि झूला पुल समय पर तैयार हो गया होता तो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को जान जोखिम में डालकर यात्रा नहीं करनी पड़ती।

बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत सहित मद्महेश्वर घाटी के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने झूला पुल का निर्माण शीघ्र पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि मध्यमहेश्वर यात्रा क्षेत्र की आर्थिकी का प्रमुख आधार है और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधूरा पुल न केवल स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक पर्यटन व्यवस्था और तीर्थाटन की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

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