Date/12/09/2026
देहरादून। दून यूनिवर्सिटी, भारत और सेंटर फॉर रिसर्च एंड एडवांस्ड स्टडीज (सिनवेस्टाव), मेक्सिको) ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय एकेडमिक सहयोग और साझेदारी की नींव रखने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एम. ओ. यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं। 1961 में स्थापित सिनवेस्टाव, नेचुरल साइंसेज, इंजीनियरिंग और ह्यूमैनिटीज के क्षेत्रों में एडवांस्ड रिसर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है। एक स्वायत्त, केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित पब्लिक रिसर्च संस्थान के रूप में, सिनवेस्टाव मेक्सिको में 11 कैंपस के नेटवर्क के माध्यम से काम करता है और इसने अत्याधुनिक रिसर्च और एडवांस्ड स्टडीज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों प्रमुख संस्थानों के बीच एकेडमिक, वैज्ञानिक और रिसर्च सहयोग को बढ़ावा देना और हायर एजुकेशन, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, गणित, ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज के क्षेत्रों में भारत और मेक्सिको के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।
लोकभवन में अयोजित कार्यक्रम में दून यूनिवर्सिटी के चांसलर और उत्तराखंड के गवर्नर, लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की मैक्सिको में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन दीप्ति गंजी, दून यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. सुरेखा डंगवाल, सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टो सांचेज हर्नांडेज, सिनवेस्टाव की इंटरनेशनल रिलेशंस की कोऑर्डिनेटर प्रो. मार्था एस्पिनोसा, सिनवेस्टाव की सेक्रेटरी ऑफ प्लानिंग प्रो. जेनेट मुरबार्टियन, सिनवेस्टाव एकेडमिक सेक्रेटरी डॉ. अब्देल पेरेज लोरेन्जाना और दून यूनिवर्सिटी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर, डॉ. अरुण कुमार के साथ-साथ सिनवेस्टाव के सीनियर अधिकारी और वैज्ञानिक, फैकल्टी सदस्य, और रिसर्चर शामिल हुए।
उत्तराखण्ड के राज्यपाल ने कहा कि यह सहयोग भारत और मैक्सिको के बीच बढ़ते एकेडमिक और वैज्ञानिक जुड़ाव में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने एम.ओ.यू. पर साइन करने के बाद जल्द से जल्द ठोस प्रोग्राम और मापने लायक नतीजों की ओर बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने दोनों संस्थानों के लीडर्स को प्रोत्साहित किया कि वे जल्द से जल्द जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाएं ताकि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके, मिलकर प्रोजेक्ट्स तैयार किए जा सकें और इस पार्टनरशिप को लागू करने में मदद मिल सके। प्रो. सुरेखा डंगवाल (वाइस चांसलर, दून यूनिवर्सिटी) ने कहा कि सहयोग के संभावित क्षेत्रों में जॉइंट रिसर्च गतिविधियां, जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स, फैकल्टी और रिसर्चर का आदान-प्रदान, स्टूडेंट्स की आवाजाही, जॉइंट सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप का आयोजन, जॉइंट एकेडमिक प्रोग्राम्स का विकास, जॉइंट डिग्री प्रोग्राम्स की संभावना तलाशना और आपसी एकेडमिक व राष्ट्रीय हित की अन्य पहलें शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन विषयों पर मिलकर काम किया जाएगा, उनमें कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स, मैथमेटिक्स, इकोनॉमिक्स, कल्चर, डिजाइन, बायोलॉजिकल साइंसेज, एनवायर्नमेंटल साइंसेज, साइकोलॉजी और अर्बन डेवलपमेंट मैनेजमेंट शामिल हैं।