350 करोड़ की रोपवे परियोजना पर फिर उठे सवाल, चार पिलर अब भी खड़े नहीं हुए

Date/30/10/2026

मसूरी। बहुप्रतीक्षित पुरुकुल-मसूरी रोपवे परियोजना के निर्माण कार्य और पिलरों की सुरक्षा को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रवींद्र जुगरान ने एक बार फिर निरीक्षण किया। उन्होंने दो दिनों तक परियोजना के सभी 26 पिलरों का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण की प्रगति और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने करीब पांच से छह पिलरों की सुरक्षा के दृष्टिगत तकनीकी समीक्षा और जांच की आवश्यकता जताई। साथ ही निर्माण कार्य की धीमी गति पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्धारित समय पर परियोजना पूरी होने को लेकर भी सवाल उठाए।

रवींद्र जुगरान ने बताया कि पुरुकुल-मसूरी रोपवे परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 285 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लगभग साढ़े पांच किलोमीटर लंबी इस परियोजना के शुरू होने से पुरुकुल से मसूरी तक का सफर करीब 35 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। रोपवे में लगभग 52 केबिन संचालित किए जाने प्रस्तावित हैं।

उन्होंने बताया कि परियोजना को पहले सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्माण कार्य में देरी के चलते अब मई 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जुगरान ने कहा कि जिस गति से निर्माण कार्य चल रहा है, उसे देखते हुए निर्धारित समय पर रोपवे का संचालन शुरू होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। ऐसे में आगामी पर्यटन सीजन में भी पर्यटकों को इस सुविधा का लाभ मिलने की संभावना कम है।

उन्होंने यह भी बताया कि निरीक्षण के दौरान करीब चार पिलर अभी तक खड़े नहीं हो पाए हैं, जबकि पांच से छह पिलरों की सुरक्षा को लेकर तकनीकी समीक्षा की जरूरत महसूस हुई है। उन्होंने संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था से निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ ही पिलरों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की गंभीरता से जांच कराने की अपेक्षा जताई। निरीक्षण के दौरान पर्यावरण प्रेमी डॉ. दीपक जोशी और रवींद्र सिंह गुसाईं भी मौजूद रहे।

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