Date/06/11/2026
रुद्रप्रयाग। हिमालय की गोद में समुद्रतल से सर्वाधिक ऊंचाई पर विराजमान तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शुक्रवार को दोपहर 12.30 बजे शुभ मुहूर्त में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर वेद ऋचाओं, महिलाओं के मांगल गीतों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों से संपूर्ण धाम भक्तिमय हो उठा। कपाट बंद होने के ऐतिहासिक पल के 563 श्रद्धालु साक्षी बने।
कपाट बंद होने से पूर्व ब्रह्म बेला में विद्वान आचार्यों ने भगवान तुंगनाथ का महाभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की। मठापति मुकेश मैठाणी की मौजूदगी में भगवान के स्वयंभू शिवलिंग को ब्रह्मकमल, भस्म, चंदन, पुष्प, अक्षत सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों से समाधि दी गई। इसके साथ ही भगवान तुंगनाथ जगत कल्याण के लिए शीतकालीन तपस्या में लीन हो गए।
कपाट बंद होने के पश्चात भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने मुख्य मंदिर सहित सहायक मंदिरों की परिक्रमा की और कैलाश से शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हुई। सुरम्य एवं मखमली बुग्यालों के बीच नृत्य करते हुए डोली प्रथम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंची। यहां देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों, जीप-टैक्सी यूनियन तथा घोड़े-खच्चर संचालकों ने पुष्पवर्षा और भव्य स्वागत के साथ डोली का अभिनंदन किया। इस वर्ष तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड आवाजाही रही। कपाट बंद होने के पावन अवसर पर 563 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि संपूर्ण यात्रा काल में कुल 1,97,424 तीर्थयात्रियों ने भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और विश्व कल्याण एवं समृद्धि की कामना की।
शनिवार को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न यात्रा पड़ावों से होते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर अंतिम रात्रि प्रवास के लिए भनकुण्ड पहुंचेगी। इसके बाद 8 नवंबर को डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में विराजमान होगी। वहीं, 9 नवंबर से भगवान तुंगनाथ की शीतकालीन पूजा विधिवत रूप से प्रारंभ होगी।
मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रागंड ने बताया कि इस वर्ष तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। क्षमता से अधिक तीर्थयात्रियों के पहुंचने से यात्रा में रिकॉर्ड बना है और मंदिर समिति की आय में भी वृद्धि हुई है। मंदिर समिति के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि मंदिर समिति के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल के प्रयासों से जोलीग्रांट, देहरादून के श्रद्धालुओं की ओर से कपाट बंद होने के पावन अवसर पर तुंगनाथ मंदिर को दस कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
इस अवसर पर पूर्व मठापति राम प्रसाद मैठाणी, अतुल मैठाणी, अभिषेक मैठाणी, गीता राम मैठाणी, भरत मैठाणी, वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी, ग्राम प्रधान सुनीता मैठाणी, विनोद नेगी, चंद्र मोहन बजवाज, आनंद सिंह रावत, उमेद सिंह नेगी, नरेंद्र भंडारी, जीतपाल भंडारी, अनिल जिरवाण, धीर सिंह नेगी, शिव सिंह रावत, दीपक बमोला, शंकर सिंह नेगी, सतीश पंवार, राहुल नेगी सहित मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी, हक-हकूकधारी एवं सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।