Date/01/05/2026
पिथौरागढ़। सीमांत जिला पिथौरागढ़ में आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा की शुरुआत हो गई है। सीमांत धारचूला से एसडीएम आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 यात्रियों को रवाना किया। यात्रा के लिए अब तक 500 यात्रियों के आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 350 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं। यात्रा के शुभारंभ के दौरान शिवभक्तों ने हर-हर महादेव से गूज उठा। प्रशासन की ओर से यात्रा को लेकर सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
धारचूला से रवाना हुए यात्री करीब 140 किलोमीटर की यात्रा कर गुंजी और कुटी होते हुए ज्योलिंगकांग पहुंचेंगे। यहां पार्वती सरोवर से आदि कैलाश के दर्शन करेंगे। इसके बाद गुंजी लौटकर नाभिढांग जाएंगे, जहां से ऊं पर्वत के दर्शन होंगे। इस दौरान पुलिस उपाधीक्षक धारचूला कुंवर सिंह रावत और एसओ हरेंद्र सिंह नेगी ने यात्रियों और चालकों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की। पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता जरूरी है। यात्रा शुरू होते ही धारचूला, गुंजी, कुटी और ज्योलिंगकांग तक गतिविधियां तेज हो गई हैं। टूर ऑपरेटर, होमस्टे संचालक और होटल व्यवसायियों में उत्साह देखा जा रहा है।
अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र की पहचान तेजी से बढ़ी। तीन साल पहले जहां पर्यटकों की संख्या 2 हजार से कम थी, अब यह 30 हजार के पार पहुंच चुकी है। इस साल एक लाख पर्यटकों के आने का अनुमान है। आदि कैलाश को अब कैलाश मानसरोवर के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। जहां चारधाम यात्रा में 5 से 11 दिन लगते हैं, आदि कैलाश यात्रा 5 से 7 दिन में पूरी हो जाती है। कम भीड़ और प्राकृतिक अनुभव के कारण युवा इसे तेजी से पसंद कर रहे हैं। आदि कैलाश यात्रा 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा रहता है।