Date/12/05/2026
देहरादून। अदिति कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और रंगमंच एवं लोक प्रदर्शन कला विभाग, दून विश्वविद्यालय, देहरादून के संयुक्त सहयोग से और आईसीएसएसआर द्वारा वित्तपोषित अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड की लोक कला एवं रामलीलाओं में महिलाओं की सहभागिता विषय पर एक विशेष संगोष्ठी एवं फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया जा किया गया। संगोष्ठी और फोटो प्रदर्शनी का उद्देश्य लोक परंपराओं, रामलीला एवं कृष्णलीला जैसी सांस्कृतिक विधाओं में महिलाओं की भूमिका, योगदान और सामाजिक प्रभाव पर गंभीर विमर्श स्थापित करना है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल एवं डीन, डीएसडब्ल्यू प्रो. एच.सी. पुरोहित उपस्थित थे। वहीं मुख्य वक्ताओं के रूप में दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. नीना पांडे, सरिता जुयाल तथा आशा बहुगुणा अपने विचार साझा किये। सरिता जुयाल एवं आशा बहुगुणा लोक परंपराओं और रामलीला-कृष्णलीला से जुड़े सांस्कृतिक अनुभवों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने अपने संदेश में लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता लोक संस्कृति को नई ऊर्जा, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना प्रदान करती है। डीन, डी.एस.डब्ल्यू. प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा कि लोक कलाएं समाज की सांस्कृतिक पहचान का आधार हैं तथा इनमें महिलाओं की भूमिका पर गंभीर विमर्श समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों को सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।