Date/23/09/2026
देहरादून। मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को दुरुस्त करने के लिए उत्तराखंड के सभी जिलों में युद्धस्तर पर काम शुरू हो गया है। कुमाऊं से गढ़वाल और पहाड़ से मैदान तक विभागीय टीमें फील्ड में उतरकर सड़कों की मरम्मत में जुटी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 अक्टूबर तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने की समयसीमा तय की है और अभियान की प्रगति की मुख्यमंत्री स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है। मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन से प्रदेश में कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कहीं गड्ढे बने हैं तो कहीं सड़क के हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। इससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश का दौर कम होते ही मुख्यमंत्री ने सड़क मरम्मत को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों को तत्काल फील्ड में उतरने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सड़क मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति स्वीकार नहीं होगी। काम निर्धारित मानकों के अनुरूप और टिकाऊ होना चाहिए। इसी के तहत प्रदेश के सभी जिलों में क्षतिग्रस्त सड़कों और संपर्क मार्गों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर काम कराया जा रहा है।
पहाड़ से मैदान तक एक साथ अभियान
पर्वतीय जिलों में मुख्य सड़कों के साथ ग्रामीण और संपर्क मार्गों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, पर्यटन और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच की जीवनरेखा भी हैं। इसी तरह मैदानी क्षेत्रों में बारिश और जलभराव से क्षतिग्रस्त सड़कों को दुरुस्त करने का काम तेजी से किया जा रहा है।
विभागीय टीमें मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन कर रही हैं। जहां सामान्य पैचवर्क की जरूरत है वहां तत्काल मरम्मत कराई जा रही है, जबकि अधिक क्षतिग्रस्त हिस्सों पर आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। अधिकारियों को काम की नियमित समीक्षा के साथ प्रतिदिन प्रगति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।