सम्बन्धित अधिकारियों की लापरवाही पर मुख्य सचिव ने जताई कड़ी नाराजगी

Date/23/09/2026

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में ज्योलिकोट, नैनीताल में दूषित पेयजल की घटना के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। मुख्य सचिव ने घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि प्रदेश में मजबूत फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर प्राप्त नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर सहित बड़ी संख्या में फील्ड स्तर के कार्मिकों का नेटवर्क हमारे पास है। इस नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करते हुए इनफॉर्मेशन एवं फीडबैक मैकेनिज्म विकसित किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता या अन्य स्वास्थ्य आदि से सम्बन्धित समस्या की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सके। इसके लिए प्रभावी सूचना एवं फीडबैक मैकेनिज्म तैयार कर नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग एवं जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाटर सप्लाई सिस्टम में सोर्स से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स आदि तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग करायी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों में प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस दौरान सोर्स, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स तथा कंज्यूमर एंड पर संभावित लीकेज की जांच की जाए। स्टोरेज टैंकों की सफाई की तिथि, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता एवं उपयोग, पानी में कॉलीफॉर्म सहित अन्य आवश्यक पैरामीटर्स की जांच और उनका नियमित रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पेयजल एवं सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिन्हित कराए जाने एवं जहां पुराने पाइप हैं, वहां उनके रिप्लेसमेंट सहित आवश्यक रेमेडियल मेजर्स लिए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पेयजल लाईनों एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार कर उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी, इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखना आवश्यक है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

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